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आतंकी

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Sep 28 08 4:20 PM

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हम उस देश के वासी हैं जहाँ अतिथी को भगवान माना जाता है,
जागो, के अपनी परंपरा का कोई फ़ायदा उठाना चाहता है,
हमे इसे रोकने के लिए कुछ करना चाहिए........
अगर हमें मानवता की रक्षा कबूल है,
तो आतंकियों से बात करमा भी अब फिजूल है,
ऐसा कोई कुत्ता काटे तो तुम भी कुत्ते को काट लो,
Security system लापरवाही करे तो सालों को वहीँ गाड दो,
नियम यही है, आज बो लो, कल रो लो,
क्योंकि काटना यही है,
अब और human rights वालों का मुह ताकना नहीं है,
Political parties को इस पर राजनीती मत करने दो,
Pseudo secularism अब और मत बढ़ने दो,
नाजायज़ आतंकी camps जड़-सहित उडा दो,
रक्षकों के अधिकार shoot on the spot तक बढा दो,
Police और intelligence terrorism से लड़ सकते है,
पर वो भी हमारी मदद के बिना क्या कर सकते है?
तंत्र आपका है, इससे इतना मजबूत बनाओ,
के आतंकी इसे भेद न पाए,
आम जन में सतर्कता जगाओ,
अपने गली, मोहल्ले और बाज़ारों को कड़े पहरों से सजाओ,
अब कारण जानने का वक़्त नहीं है,
बात करने का वक़्त नहीं है,
याद रहे के आतंकी का कोई धर्मं नहीं है.........
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#1 [url]

Sep 29 08 7:39 PM

aatanki ka koi dharam nahi hai

kitni sachhi baat kahi hai aapne
aur is tarah ki josh dilati hui aaina dikhati hui kavita aaj ki zarurat hai

kaash kuch log jaag jaaye

user posted image

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#3 [url]

Sep 29 08 8:40 PM

QUOTE (Gillu @ September 28, 2008 04:20 pm)
हम उस देश के वासी हैं जहाँ अतिथी को भगवान माना जाता है,
जागो, के अपनी परंपरा का कोई फ़ायदा उठाना चाहता है,
हमे इसे रोकने के लिए कुछ करना चाहिए........
अगर हमें मानवता की रक्षा कबूल है,
तो आतंकियों से बात करमा भी अब फिजूल है,
ऐसा कोई कुत्ता काटे तो तुम भी कुत्ते को काट लो,
Security system लापरवाही करे तो सालों को वहीँ गाड दो,
नियम यही है, आज बो लो, कल रो लो,
क्योंकि काटना यही है,
अब और human rights वालों का मुह ताकना नहीं है,
Political parties को इस पर राजनीती मत करने दो,
Pseudo secularism अब और मत बढ़ने दो,
नाजायज़ आतंकी camps जड़-सहित उडा दो,
रक्षकों के अधिकार shoot on the spot तक बढा दो,
Police और intelligence terrorism से लड़ सकते है,
पर वो भी हमारी मदद के बिना क्या कर सकते है?
तंत्र आपका है, इससे इतना मजबूत बनाओ,
के आतंकी इसे भेद न पाए,
आम जन में सतर्कता जगाओ,
अपने गली, मोहल्ले और बाज़ारों को कड़े पहरों से सजाओ,
अब कारण जानने का वक़्त नहीं है,
बात करने का वक़्त नहीं है,
याद रहे के आतंकी का कोई धर्मं नहीं है.........

आखिर इन वीभत्स्व
बमकाँडों का उद्देश्य क्या है???????????????????????????

.............विवेक रंजन श्रीवास्तव


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#4 [url]

Sep 29 08 11:29 PM

QUOTE (Gillu @ September 28, 2008 04:20 pm)
हम उस देश के वासी हैं जहाँ अतिथी को भगवान माना जाता है,
जागो, के अपनी परंपरा का कोई फ़ायदा उठाना चाहता है,
हमे इसे रोकने के लिए कुछ करना चाहिए........
अगर हमें मानवता की रक्षा कबूल है,
तो आतंकियों से बात करमा भी अब फिजूल है,
ऐसा कोई कुत्ता काटे तो तुम भी कुत्ते को काट लो,
Security system लापरवाही करे तो सालों को वहीँ गाड दो,
नियम यही है, आज बो लो, कल रो लो,
क्योंकि काटना यही है,
अब और human rights वालों का मुह ताकना नहीं है,
Political parties को इस पर राजनीती मत करने दो,
Pseudo secularism अब और मत बढ़ने दो,
नाजायज़ आतंकी camps जड़-सहित उडा दो,
रक्षकों के अधिकार shoot on the spot तक बढा दो,
Police और intelligence terrorism से लड़ सकते है,
पर वो भी हमारी मदद के बिना क्या कर सकते है?
तंत्र आपका है, इससे इतना मजबूत बनाओ,
के आतंकी इसे भेद न पाए,
आम जन में सतर्कता जगाओ,
अपने गली, मोहल्ले और बाज़ारों को कड़े पहरों से सजाओ,
अब कारण जानने का वक़्त नहीं है,
बात करने का वक़्त नहीं है,
याद रहे के आतंकी का कोई धर्मं नहीं है.........

gillu ji
aapne aatankvaad par shabdon ke maadhyam se apna aakrosh vyakt kiya
sahitykaar ki kalam talwaar se bhi tej hoti , ye jaroor asar dikhayegi

bas ek baat kahna chaahoonga (ho sake to plz bura na manen)
aap shabdon ko roop dene men saksham hain.
aap jab sahity srijan men lage hai tab yadi ek hi bhasha men likhen to vah aapki pratibha ko aur ooncha pahunchayegi , lekin aap apni bhaavnaon ko kewal smpreshit karna chaahte hain to aap shi hain , aur aapka ye tareeka sabko achchha bhi laga hoga


ummeed hai aapki aur achchhi rachnaayen hame yoon hi padhne ko milengi

aapka

vijay

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