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ग़ज़ल

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Apr 28 08 9:37 PM

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ग़ज़ल
क्या मिला सम्बन्ध सबसे तोड़कर
साथ चलना था सभी को जोड़कर

आदमी है आदमी बन के ही रह
यूं खुदा से तू न कोई होड़कर

ज़िंदगी घाटा है या फिर है नफा
देख लो सब कुछ घटाकर, जोड़कर

बात तक करने की भी फुरसत नहीं
क्या करोगे इतनी दौलत जोड़कर

साँस भी अपनी नहीं होती कभी
एक दिन जाती है ये भी छोड़कर

कवि दीपक गुप्ता
9811153282 - 9311153282
http://www.kavideepakgupta.com

कवि दीपक गुप्ता
9811153282 - 9311153282
http://www.kavideepakgupta.com/

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#2 [url]

Apr 29 08 5:45 PM

QUOTE (kavideepakgupta @ April 28, 2008 09:37 pm)
ग़ज़ल
क्या मिला सम्बन्ध सबसे तोड़कर
साथ चलना था सभी को जोड़कर

आदमी है आदमी बन के ही रह
यूं खुदा से तू न कोई होड़कर

ज़िंदगी घाटा है या फिर है नफा
देख लो सब कुछ घटाकर, जोड़कर

बात तक करने की भी फुरसत नहीं
क्या करोगे इतनी दौलत जोड़कर

साँस भी अपनी नहीं होती कभी
एक दिन जाती है ये भी छोड़कर

कवि दीपक गुप्ता
9811153282 - 9311153282
http://www.kavideepakgupta.com

sach kaha hai deepak ji

saans toh kabhi nahi hoti apni.
jane kab chali jaye chodkar

justju/fantastic.gif

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#3 [url]

May 6 08 9:28 PM

आदमी है आदमी बन के ही रह
यूं खुदा से तू न कोई होड़कर

Aaadmi main jalan to aise aayi hai


ज़िंदगी घाटा है या फिर है नफा
देख लो सब कुछ घटाकर, जोड़कर

pata nahi kitna soch kar fayada dekh kar dosti hoti hai aajkal har rishte nafa nuksaan main tulta hai

mujhe aapke ye dono sher bahut pasand aaye

user posted image

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