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तेरे पग के नूपुर

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Jun 1 07 11:09 AM

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दुश्मन हैं मेरे, तेरे पग के नूपुर-

तेरे संग जो दो पल रह लूँ मैं,
मौसम को भी ये भरमाते,
कण-कण में कल-कल जड़ देते,
ध्वनियों को हैं ये मदमाते,
कदमों को तेरे अल्हड़पन दे,
मेरे धैर्य पे हैं ये मुस्काते,
तेरे नयनों में शर्म जगा-
बेशर्म से हैं ये इठलाते ,
मेरे दिल में भर देते फिर ये-
कंपन बहुतेरे, तेरे पग के नूपुर,
दुश्मन हैं मेरे, तेरे पग के नूपुर।

जब शांत समय को पाकर मैं,
तेरे कानों में कुछ कहता हूँ,
जब हवा चुपके से आती है,
उससे छुप कर मैं रहता हूँ,
फिर तेरी हंसी में जग अपना,
खोता हूँ, उसमें बहता हूँ,
और तेरे बदन में सिहरन को,
अपनी सिहरन से लहता हूँ,
उस पल क्यों, अपने राग में ही-
धुन हैं छेड़े , तेरे पग के नूपुर,
दुश्मन हैं मेरे , तेरे पग के नूपुर।

जब अपनी चाहत के पथ से,
हूँ छांटता अनुचित बातों को,
जब प्रीत से विमुख हर दिल से,
हूँ काटता चोटिल घातों को,
जब रंग सपनों के देता हूँ,
अपने दिन-अपनी रातों को,
जब तेरी बाहों में खोकर,
खोता हूँ अपनी मातों को,
उसपल हीं क्यों रूनझून करते--
उलझन हैं रे, तेरे पग के नूपुर,
दुश्मन हैं मेरे, तेरे पग के नूपुर।


-विश्व दीपक 'तन्हा'
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#1 [url]

Jun 1 07 11:36 AM

Sunder Abhivayakti.

Likte Rahiye.
Sanjay

"ढूँढा सब जहाँ में, पाया पता तेरा नहीं
अब पता तेरा मिला, तो पता मेरा नहीं"

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#2 [url]

Jun 1 07 2:54 PM

तेरे संग जो दो पल रह लूँ मैं,
मौसम को भी ये भरमाते,
कण-कण में कल-कल जड़ देते,
ध्वनियों को हैं ये मदमाते,
कदमों को तेरे अल्हड़पन दे,
मेरे धैर्य पे हैं ये मुस्काते,
तेरे नयनों में शर्म जगा-
बेशर्म से हैं ये इठलाते ,
मेरे दिल में भर देते फिर ये-
कंपन बहुतेरे, तेरे पग के नूपुर,
दुश्मन हैं मेरे, तेरे पग के नूपुर



Bohat badhiya..........


जब शांत समय को पाकर मैं,
तेरे कानों में कुछ कहता हूँ,
जब हवा चुपके से आती है,
उससे छुप कर मैं रहता हूँ,
फिर तेरी हंसी में जग अपना,
खोता हूँ, उसमें बहता हूँ,
और तेरे बदन में सिहरन को,
अपनी सिहरन से लहता हूँ,
उस पल क्यों, अपने राग में ही-
धुन हैं छेड़े , तेरे पग के नूपुर,
दुश्मन हैं मेरे , तेरे पग के नूपु



Wah...kya baat hai

जब अपनी चाहत के पथ से,
हूँ छांटता अनुचित बातों को,
जब प्रीत से विमुख हर दिल से,
हूँ काटता चोटिल घातों को,
जब रंग सपनों के देता हूँ,
अपने दिन-अपनी रातों को,
जब तेरी बाहों में खोकर,
खोता हूँ अपनी मातों को,
उसपल हीं क्यों रूनझून करते--
उलझन हैं रे, तेरे पग के नूपुर,
दुश्मन हैं मेरे, तेरे पग के नूपुर।



Namaskaar Deepak jee


Dil ki zameen pe likhi pyaar ka sagar chhalkati hui ye khoobsurat rachna jiski tarif karne k liye aaj mere lafz nahi hai..in dino mein padhi sabse alag aur umda kavita aapki..bas yahi dil karta hai ki baar-2 ise gun-gunata rahu...Upar wala aapki kalam ko yuhi roshan rakhe aur hamein aesa hamesha padhne ko milta rahe...


shukriyah aapka is pyaar bhari kavita se ru-b-ru karvane k liye

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#4 [url]

Jun 1 07 5:09 PM

QUOTE (Diggaj Dave @ June 01, 2007 02:54 pm)
तेरे संग जो दो पल रह लूँ मैं,
मौसम को भी ये भरमाते,
कण-कण में कल-कल जड़ देते,
ध्वनियों को हैं ये मदमाते,
कदमों को तेरे अल्हड़पन दे,
मेरे धैर्य पे हैं ये मुस्काते,
तेरे नयनों में शर्म जगा-
बेशर्म से हैं ये इठलाते ,
मेरे दिल में भर देते फिर ये-
कंपन बहुतेरे, तेरे पग के नूपुर,
दुश्मन हैं मेरे, तेरे पग के नूपुर



Bohat badhiya..........


जब शांत समय को पाकर मैं,
तेरे कानों में कुछ कहता हूँ,
जब हवा चुपके से आती है,
उससे छुप कर मैं रहता हूँ,
फिर तेरी हंसी में जग अपना,
खोता हूँ, उसमें बहता हूँ,
और तेरे बदन में सिहरन को,
अपनी सिहरन से लहता हूँ,
उस पल क्यों, अपने राग में ही-
धुन हैं छेड़े , तेरे पग के नूपुर,
दुश्मन हैं मेरे , तेरे पग के नूपु



Wah...kya baat hai

जब अपनी चाहत के पथ से,
हूँ छांटता अनुचित बातों को,
जब प्रीत से विमुख हर दिल से,
हूँ काटता चोटिल घातों को,
जब रंग सपनों के देता हूँ,
अपने दिन-अपनी रातों को,
जब तेरी बाहों में खोकर,
खोता हूँ अपनी मातों को,
उसपल हीं क्यों रूनझून करते--
उलझन हैं रे, तेरे पग के नूपुर,
दुश्मन हैं मेरे, तेरे पग के नूपुर।



Namaskaar Deepak jee


Dil ki zameen pe likhi pyaar ka sagar chhalkati hui ye khoobsurat rachna jiski tarif karne k liye aaj mere lafz nahi hai..in dino mein padhi sabse alag aur umda kavita aapki..bas yahi dil karta hai ki baar-2 ise gun-gunata rahu...Upar wala aapki kalam ko yuhi roshan rakhe aur hamein aesa hamesha padhne ko milta rahe...


shukriyah aapka is pyaar bhari kavita se ru-b-ru karvane k liye


bhoot acha likha hai aapne, real good poem

netra.....

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#5 [url]

Jun 2 07 1:06 PM

QUOTE (tanha kavi @ June 01, 2007 11:09 am)
दुश्मन हैं मेरे, तेरे पग के नूपुर-

तेरे संग जो दो पल रह लूँ मैं,
मौसम को भी ये भरमाते,
कण-कण में कल-कल जड़ देते,
ध्वनियों को हैं ये मदमाते,
कदमों को तेरे अल्हड़पन दे,
मेरे धैर्य पे हैं ये मुस्काते,
तेरे नयनों में शर्म जगा-
बेशर्म से हैं ये इठलाते ,
मेरे दिल में भर देते फिर ये-
कंपन बहुतेरे, तेरे पग के नूपुर,
दुश्मन हैं मेरे, तेरे पग के नूपुर।

जब शांत समय को पाकर मैं,
तेरे कानों में कुछ कहता हूँ,
जब हवा चुपके से आती है,
उससे छुप कर मैं रहता हूँ,
फिर तेरी हंसी में जग अपना,
खोता हूँ, उसमें बहता हूँ,
और तेरे बदन में सिहरन को,
अपनी सिहरन से लहता हूँ,
उस पल क्यों, अपने राग में ही-
धुन हैं छेड़े , तेरे पग के नूपुर,
दुश्मन हैं मेरे , तेरे पग के नूपुर।

जब अपनी चाहत के पथ से,
हूँ छांटता अनुचित बातों को,
जब प्रीत से विमुख हर दिल से,
हूँ काटता चोटिल घातों को,
जब रंग सपनों के देता हूँ,
अपने दिन-अपनी रातों को,
जब तेरी बाहों में खोकर,
खोता हूँ अपनी मातों को,
उसपल हीं क्यों रूनझून करते--
उलझन हैं रे, तेरे पग के नूपुर,
दुश्मन हैं मेरे, तेरे पग के नूपुर।


-विश्व दीपक 'तन्हा'

Tanha ji,

Bahut pyare ahsaas hai....bahut achchhi rachna hai

Mann ko chhu gayi....

per dost.....nupur mujhe behad prey hai

Pyeyatama ki har vastu preya hai
Preet me nupur chumna preya hai


Dhanyabad

Guru kabira ne di hai shikxa
Lalat lagau aise dikxa

kavya jan chetana bane
Guru kabira do aise bhikxa



Meri kavitaye dohri dohri
Syam socho, nikli dupahari

Upar upar doodh, niche rabdi
Nasamajh ki samajh adoori

Grahan kiya jo satya tathya
Har Pyas se ho jaye doori


Arvind Vyas "Pyas"

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#6 [url]

Jun 3 07 2:33 AM

BAHUT KHUB

AHSAS KO BAHUT HI GAHRAI SE LIKHA

DIL KO CHOOOOOOOOOO GAYA

DAAD HZIR HE justju/icon_clap.gif justju/icon_clap.gif justju/icon_clap.gif

PAHLI BAR PADHA BAHUT HI ACHA LIKHA

NUPUR PER JO BHI LIKHA KUCH ALAG SA AHSAS HE BAHUT HI ACHA

SADA KHUSH RAHE

SHAKUN PANCHHI LAYE AAS
SHUKOON KA LAYE AHSAS

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#8 [url]

Jun 4 07 2:08 PM

wah bahut khoob....deepak ji humey bahut pasand aaye "tere pag ke nupar" alag se ahsaas pesh kiye hai aapne...aapko padna bahut accha lagga.
es badiya shayri par hamari mubarakbaad kabool kijiye.

"Sunita Virender Singh"

***** Sweety *****



"Sun charkhe di mithi mithi kook,
mahiya menu yaad aavNda,
mahiya aayega taaN kushiya manavaNgi,
usde raaha.n vich palka vichavaNngi,
dukh daahde te zind.di malook,
mahiya menu yaad aavNda"

"Eh aasmaa.n wale zameen par uttar ke dekh,
Hoti hai kaya judai tu bhi bichad ke dekh......"

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#9 [url]

Jun 4 07 2:45 PM

bahoot Khoob Doston Sabne Kamaal ka Likha Hai,.

Iska Gila Nahi Ke Bahoot Gham Uthaayein Hain,.
Barbaadiaan Naseeb Mein Likhwa Ke Aaye Hain,.,

_______________________________-Azeem-

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#12 [url]

Jun 27 07 3:34 PM

जब शांत समय को पाकर मैं,
तेरे कानों में कुछ कहता हूँ,
जब हवा चुपके से आती है,
उससे छुप कर मैं रहता हूँ,
फिर तेरी हंसी में जग अपना,
खोता हूँ, उसमें बहता हूँ,
और तेरे बदन में सिहरन को,
अपनी सिहरन से लहता हूँ,
उस पल क्यों, अपने राग में ही-
धुन हैं छेड़े , तेरे पग के नूपुर,
दुश्मन हैं मेरे , तेरे पग के नूपुर।


bahut bahut pyara khyaal aur meethi si baat bahut achha laga tumhe in ehsaason main padhna

user posted image

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#13 [url]

Jul 18 07 9:50 PM

दीदी आपको फिर से प्यार

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