Tags : :
मदीरा हूं मै बनी हूं प्यालो में छलकने के लिये
मिटा देती हूं खुद को दिल लोगो का बहलाने के लिये
जमाना मुझे खराब कहता है, शायर कहते है शराब है
एक बार लगा लो होटों से गम अपने भुलाने के लिये॥
आग का समन्दर हुं मै, हूं रातो की रोशनी भी
शायरो की शायरी हूं मै, रातो की मै रोशनी भी
नासमझ है जो मुझसे खेला करते है, घर अपना जलाने के लिये॥
हर मुल्क की जरुरत हूं मै, कभी राजाओ की थी आन भी
हर मजहब की जान हूं मै, हूं हर महफिल की शान भी
युद्ध में पीते है कायर कायरता अपनी छिपाने के लिये॥
मुझे नफरत से देखने वालो, मेरी फितरत को बदनाम करने वालो
एक बार नजर उठा कर देखो अपने देवालयों की तरफ
सदियों से देवता पी रहे है महफिले अपनी सजाने के लिये॥
Netra.......
मिटा देती हूं खुद को दिल लोगो का बहलाने के लिये
जमाना मुझे खराब कहता है, शायर कहते है शराब है
एक बार लगा लो होटों से गम अपने भुलाने के लिये॥
आग का समन्दर हुं मै, हूं रातो की रोशनी भी
शायरो की शायरी हूं मै, रातो की मै रोशनी भी
नासमझ है जो मुझसे खेला करते है, घर अपना जलाने के लिये॥
हर मुल्क की जरुरत हूं मै, कभी राजाओ की थी आन भी
हर मजहब की जान हूं मै, हूं हर महफिल की शान भी
युद्ध में पीते है कायर कायरता अपनी छिपाने के लिये॥
मुझे नफरत से देखने वालो, मेरी फितरत को बदनाम करने वालो
एक बार नजर उठा कर देखो अपने देवालयों की तरफ
सदियों से देवता पी रहे है महफिले अपनी सजाने के लिये॥
Netra.......