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Jan 13 07 3:08 PM

साकी अब मेरा ज़ाम न भर! मदहोश हुआ बेहोश न कर!
मयखाना महफ़िल खूब हुआ! अब जाने दे मुझे अपने घर!

मैं तन्हा भी हू रात भी है! ना कोई मेरे साथ भी है!
थामे मुझको कोई क्यों कर! खाके ठोकर गिर गया अगर!

पीने से क्या गम जाता है! क्यों मुझको तु बहलाता है!
यारा ऐसा होता जो अगर! ये दुनियां पीती शाम-सहर!

bahut khoob .....very beautiful lines ..,.