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Sep 29 08 8:40 PM

QUOTE (Gillu @ September 28, 2008 04:20 pm)
हम उस देश के वासी हैं जहाँ अतिथी को भगवान माना जाता है,
जागो, के अपनी परंपरा का कोई फ़ायदा उठाना चाहता है,
हमे इसे रोकने के लिए कुछ करना चाहिए........
अगर हमें मानवता की रक्षा कबूल है,
तो आतंकियों से बात करमा भी अब फिजूल है,
ऐसा कोई कुत्ता काटे तो तुम भी कुत्ते को काट लो,
Security system लापरवाही करे तो सालों को वहीँ गाड दो,
नियम यही है, आज बो लो, कल रो लो,
क्योंकि काटना यही है,
अब और human rights वालों का मुह ताकना नहीं है,
Political parties को इस पर राजनीती मत करने दो,
Pseudo secularism अब और मत बढ़ने दो,
नाजायज़ आतंकी camps जड़-सहित उडा दो,
रक्षकों के अधिकार shoot on the spot तक बढा दो,
Police और intelligence terrorism से लड़ सकते है,
पर वो भी हमारी मदद के बिना क्या कर सकते है?
तंत्र आपका है, इससे इतना मजबूत बनाओ,
के आतंकी इसे भेद न पाए,
आम जन में सतर्कता जगाओ,
अपने गली, मोहल्ले और बाज़ारों को कड़े पहरों से सजाओ,
अब कारण जानने का वक़्त नहीं है,
बात करने का वक़्त नहीं है,
याद रहे के आतंकी का कोई धर्मं नहीं है.........

आखिर इन वीभत्स्व
बमकाँडों का उद्देश्य क्या है???????????????????????????

.............विवेक रंजन श्रीवास्तव