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May 1 08 11:20 PM

QUOTE (vijaytiwarikislay @ May 01, 2008 10:20 pm)
सखी जी,

अभिवन्दन

पहली बार आपकी रचना पढ़ी. आपकी अभिव्यक्ति में भावनाओं और अनुभव का सामंजस्य स्पष्ट रूप से दिखाई दिया . यथार्थ में यदि हमारे जीवन से यादें हट जाएँ तो तो शायद हम अधूरे रह जाएँगे. यादे ही तो एक -दूसरे से हमें जोड़े रखती हैं ..

इसलिए आपकी ग़ज़ल सच्चाई के धरातल पर साकार हो उठी है.


तनहाईयाँ मिली तो हम घबरा के रो दिए
जब याद तेरी आई तो दिल तड़पा के रो दिए

जब ना दिखा कोई हमें अपने आस पास
तब याद तेरी हर तरफ बिखरा के रो दिए

तुम इस तरह गये कि हर खुशी साथ ले गये
जब दुख ने आके घेरा तो घबरा के रो दिए

कोई भी याद ना करे हमें आज कल' सखी'
ये बात याद आई तो दिल को समझा के रो दिए

इस ग़ज़ल और ऐसी अभिवक्ति के लिए बधाई.

आपका
विजय तिवारी "किसलय"

kislay ji

bahut acha laga apko yahan dekha ..aur itne ache tareeke se apne ispe rvw diya ki dil khush ho gya...bhaut khub laga andaz..

sahi kaha yaade hi hai jo jeene ka sahara hoti hai jeevan poora karti hai..

bas yuhi aate rahna

hoshla dena

sakhi justju/smiley-faces22.gif