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Apr 29 08 5:45 PM

QUOTE (kavideepakgupta @ April 28, 2008 09:37 pm)
ग़ज़ल
क्या मिला सम्बन्ध सबसे तोड़कर
साथ चलना था सभी को जोड़कर

आदमी है आदमी बन के ही रह
यूं खुदा से तू न कोई होड़कर

ज़िंदगी घाटा है या फिर है नफा
देख लो सब कुछ घटाकर, जोड़कर

बात तक करने की भी फुरसत नहीं
क्या करोगे इतनी दौलत जोड़कर

साँस भी अपनी नहीं होती कभी
एक दिन जाती है ये भी छोड़कर

कवि दीपक गुप्ता
9811153282 - 9311153282
http://www.kavideepakgupta.com

sach kaha hai deepak ji

saans toh kabhi nahi hoti apni.
jane kab chali jaye chodkar

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