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Apr 29 08 5:41 PM

QUOTE (kavideepakgupta @ April 28, 2008 09:47 pm)
जब अपना मुंह खोलो तुम
बात पते की बोलो तुम

ठीक वक्त औ' ठीक जगह
अपने पत्ते खोलो तुम

सोचो तुम क्या हो, क्यों हो
खुद को कभी टटोलो तुम

वक्त है धागा , मोती बन
खुद को आज पिरो लो तुम

सपनों, मुझको जगना है
नौ दो ग्यारह हो लो तुम

कवि दीपक गुप्ता - 9811153282 - 9311153282
www.kavideepakgupta.com

bahut hi acha andaaz hai aapka

dilse daad deti hoon kabool farmayain.

nira