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Oct 6 07 1:11 PM

मुझको तोड़ भी दो अब तराश भी दो
मुझ को प्यार भी दो मुझको प्यास भी दो
क्यों सोचते हो मुझ में अहसास नही है
क्यों सोचते हो बर्फ़ में प्यास नही है
क्यों सोचते हो तुम्हे ई मेरी जुस्तज़ू है
क्यों सोचते हो मुझे तलाश नही है
क्यों सोचते हो बर्फ़ में प्यास नही है

behad khoobsurat..
pyaar ek bahut sunder roop aur ek naya rang
abha