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Sep 16 07 10:27 PM

QUOTE (Parul @ September 16, 2007 03:24 pm)

कुछ कहे कुछ अनकहे क़िस्से ज़बानी हो गये....
कितने ही साहिल समंदर मे कहानी हो गये ।

जगमगाती चाँद राते अब न बहला पाएँगी...
स्याह रातों के सितारे ज़िन्दगानी हो गये ।

वो शफक का पहला तारा वो उफक़ पे ढलती शाम.....
वस्ल के मासूम लम्हों की निशानी हो गये।

जब कभी टूटे खिलौने जोड़ कर वो खुश हूआ…………
ज़र्द चेहरों के मसाइल आसमानी हो गये ।

कुछ कहे कुछ अनकहे क़िस्से ज़बानी हो गये....

bahut hii khoob ...daad