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Jun 27 07 3:34 PM

जब शांत समय को पाकर मैं,
तेरे कानों में कुछ कहता हूँ,
जब हवा चुपके से आती है,
उससे छुप कर मैं रहता हूँ,
फिर तेरी हंसी में जग अपना,
खोता हूँ, उसमें बहता हूँ,
और तेरे बदन में सिहरन को,
अपनी सिहरन से लहता हूँ,
उस पल क्यों, अपने राग में ही-
धुन हैं छेड़े , तेरे पग के नूपुर,
दुश्मन हैं मेरे , तेरे पग के नूपुर।


bahut bahut pyara khyaal aur meethi si baat bahut achha laga tumhe in ehsaason main padhna

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