#1 [url]

Jun 21 07 12:13 PM

मदीरा हूं मै बनी हूं प्‍यालो में छलकने के लिये
मिटा देती हूं खुद को दिल लोगो का बहलाने के लिये
जमाना मुझे खराब कहता है, शायर कहते है शराब है
एक बार लगा लो होटों से गम अपने भुलाने के लिये॥

kya baat hai madira ki tarif bhi badhi khoob ki hai netra aaapne


आग का समन्दर हुं मै, हूं रातो की रोशनी भी
शायरो की शायरी हूं मै, रातो की मै रोशनी भी
नासमझ है जो मुझसे खेला करते है, घर अपना जलाने के लिये॥

bahut sach bahut sach

हर मुल्क की जरुरत हूं मै, कभी राजाओ की थी आन भी
हर मजहब की जान हूं मै, हूं हर महफिल की शान भी
युद्ध में पीते है कायर कायरता अपनी छिपाने के लिये॥

मुझे नफरत से देखने वालो, मेरी फितरत को बदनाम करने वालो
एक बार नजर उठा कर देखो अपने देवालयों की तरफ
सदियों से देवता पी रहे है महफिले अपनी सजाने के लिये॥

kya baat hai mujhe bahut bahut pasand aayi aapki ye koshish

kuch hum khate hain

Madira se bhulate gum todha sa muskara lete hain
hum kuch is tarah se bejaan zindgi bita lete hain

user posted image