#1 [url]

Jun 10 07 5:37 AM

मुझमें दो दो शख्स हैं भाई
एक मैं हूँ इक है परछाई ------------- sach parchayi sadaa saath rahti hai.

एक जोड़ा मैने आँख है पाई
एक मेरी और एक पराई

मैं आया तो ये भी आई
गीत ग़ज़ल मेरी परछाई

मेरा मुझ में क्या है भाई
जिस्म पराया साँस पराई ---------- dono hi humari amannat nahin hain

दोनो प्यार से रहते मुझ में
एक झूठ और इक सच्चाई

ये दोनो राहें उस की रहें
एक रास्ता एक है खाई

दो दो मेरी तहरीरें हैं
इक में मैं इक बात पराई

कौन कौन हैं मेरे अंदर
धड़कन मेरी समझ ना पाई ----------- uffffffffffffff bahut se ehsaas hain samajh pana mushkil hai

कैसे सच तेरा मैं जानूं
इक बात कही इक बात छिपाई

ये दोनो सरहद मेरी सरहद
पास भी भाई दूर भी भाई

उस से चर्चा होता रहता है
कभी इबादत कभी दुहाई

किस को मारू किस को छोड़ू
यहाँ भी भाई वहाँ भी भाई ------------- sach hi kaha hai

दोनो ने मिल के ग़ज़ल बनाई
तू और तेरा मासूम भाई


anil ji
aapki rachna aaj humne bhi apne saath bahale gayi. dil karta hai baar baar padhti rahoon. har sher ke apne jazbaat aor ehsaas hain. one of ur best creation anil ji. keep writing and sharing.

nira