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May 11 07 4:35 AM

पहले सखी का लिखा गीत सही कर दूँ

"ये रातें ये मौसम, नदी का किनारा ये चंचल हवा"

क्योंकि सखी ने र पर ही छोडा वहीं से शुरू कर रहा हूँ

रुक जा रात ठहर जा रे चंदा
बीते न मिलन की रैना

"ढूँढा सब जहाँ में, पाया पता तेरा नहीं
अब पता तेरा मिला, तो पता मेरा नहीं"