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Apr 27 07 1:46 PM

QUOTE (mohinder56 @ 27, 2007 11:46 am)
गुलाब

तुझे पाने की चाह में
हर राह मैं जनाब चला
हज़ारों फूल मिले मगर
तुझ सा ना कोई गुलाब मिला
न जाने कैसे निकल गया
वो जिन्दगी के पन्नों से
पुकारा उसको बहुत मगर
पलट के कुछ न जबाब मिला
इक उम्र तक जो रहा
बन के इन आंखों की रोशनी
टुकडे टुकडे हो कर मुझे
आज वो मेरा ख्वाब मिला
हज़ारों फूल मिले मगर
तुझ सा ना कोई गुलाब मिला

मोहिन्दर
http://dilkadarpan.blogspot.com

bahut bahut khoob mohinder ji....very beautiful ....