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Apr 27 07 1:14 PM

QUOTE (mohinder56 @ 27, 2007 11:46 am)
गुलाब

तुझे पाने की चाह में
हर राह मैं जनाब चला
हज़ारों फूल मिले मगर
तुझ सा ना कोई गुलाब मिला
न जाने कैसे निकल गया
वो जिन्दगी के पन्नों से
पुकारा उसको बहुत मगर
पलट के कुछ न जबाब मिला
इक उम्र तक जो रहा
बन के इन आंखों की रोशनी
टुकडे टुकडे हो कर मुझे
आज वो मेरा ख्वाब मिला
हज़ारों फूल मिले मगर
तुझ सा ना कोई गुलाब मिला

मोहिन्दर
http://dilkadarpan.blogspot.com

mohinder ji namaskar

kya baat hai bhut ki badiya rachna hai apki
har word ko doond doond ke likha hai aap ne
daad hazir hai


बन के इन आंखों की रोशनी
टुकडे टुकडे हो कर मुझे
आज वो मेरा ख्वाब मिला



take care and keep smiling
sagar

user posted image
उसका क्या कुसूर था जो उसको ये सज़ा दी
किया जिसने मुझ पर ख़ुद से ज़्यादा भरोसा
बता ए संग दिल क्यों मैने उसको दगा दी