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Jan 19 07 10:47 AM

QUOTE (archana @ January 13, 2007 08:41 pm)
पीने से क्या गम जाता है! क्यों मुझको तु बहलाता है!
यारा ऐसा होता जो अगर! ये दुनियां पीती शाम-सहर!

यांरा की मेरे है फ़ितरत! प्याले से उसको है नफ़रत!
जो मेरी खोज में आया गर! ढ़ा देगा मयखाने पे कहर!


कल फ़िर से लुटने आऊँगा! कुछ और अशरफ़िया लाऊंगा!
कुछ वादों पर भी यकीन कर! अब हँसते हँसते रुखसत कर!

bahut khoob likha hai....dheer .......
nice one

Shukriyaa Archanaa ji!!! aapne kalaam pe aake jo daad bakshi hai mujhe..uske liye tahe dil se shukriya!!