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Jan 16 07 2:59 PM

पीने से क्या गम जाता है! क्यों मुझको तु बहलाता है!
यारा ऐसा होता जो अगर! ये दुनियां पीती शाम-सहर!

wahhhhhhhh wahhhhhhhh sach kaha ji


बाँदाकश और भी आये है! तु उनको क्यों तरसाये है!
एह्सान ज़रा उनपे भी कर! जा उनके खाली ज़ाम तु भर!

kya baat hai janab ki aaj to andaaz hi alag hai aapke


क्यां मेरी सूरत भा ली है! अब ज़ेब भी मेरी खाली है!
ये प्यार जताना बन्द भी कर! तु एक अशरफ़ी का चाकर!

wah wah khoob kaha hai rediff chodh kar kya gazal likhai hai dost


कल फ़िर से लुटने आऊँगा! मैं और भी दौलत लाऊँगा!
कुछ वादों पर भी यकीन कर! अब हँसते हँसते रुखसत कर

bhaut khoob waade bhi wo bhi shraabi ke sahi hai ji


bhaut pyaare ehsaas sweetu

love
shrddha

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